धार्मिकमध्यप्रदेश

अखंड नवकार मंत्र के हर गुणांक का अलग महत्व है – सा.श्री तत्वलताश्रीजी

  सौरभ खेमसरा

  झाबुआ – मेघनगर नगर में आयोजित ज्ञानतत्व तपोमय चातुर्मास में रविवार को नमस्कार महामंत्र आराधना के 8वे दिन पूज्य साध्वीजी श्री तत्वलताश्रीजी महाराज साहब ने अपने प्रवचन में नवकार मंत्र की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि, नवकार महामंत्र हमारे जीवन में तब ही सिद्ध होता है, जब हमारी अटूट आस्था, और श्रद्धा नवकार पर हो। हम सौभाग्यशाली है कि हमे जन्म से नवकार मिल गया इसलिए वह हमारे पास है, लेकिन हमारे साथ नहीं है। हमारे साथ नवकार तब ही रहेगा जब हम उस पर श्रद्धा रखकर, अपने घट में बसाकर उसका स्मरण करेंगे। उक्त जानकारी देते हुए रजत कावड़िया ने बताया कि, साध्वीजी ने अखंड नवकार के 9 अंक के गुणांक के अंको की महत्वता के बारे में बतलाते हुए बताया कि, 9 के पहाड़े में 9 के पहले पद में 9 मतलब नवकार का जाप करो, 18 मतलब 18 पापस्थानक का क्षय करो, 27 से साधुओं के 27 गुणों को पहचाने, 36 से आचार्य भगवंत के 36 गुण को जाने, 45 का मतलब बताया कि, नमो सिद्धाण पर पहुंचाने वाली सिद्धशिला 45 योजन की है, 54 से बताया कि 108 नवकार से 54000 सागरोपम का नाश होता है, 63 में 63 शलाका पूर्व समाहित होती है, 72 में तीन चौबीसी शामिल होती है, 81 से नवपद की ओली के 81 आयंबिल आते है और 90 से 30 अकर्मभूमि के 90 भेद इस अखंड अक्षर के नवकार में आते है। साथ ही कावड़िया ने बताया कि, नवकार मंत्र आराधना की कल पूर्णाहुति होगी और 20 अगस्त मंगलवार को आराधना का वरघोड़ा आयोजित होगा पश्चात, आराधकों का पारणा होगा।

Navinata Akhbaar
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