
श्री नवकार आराधना का शुभारंभ।
तेजमल गाहरी
झाबुआ – राणापुर सन 1967 में देश में पहली बार नवकार आराधना का शुभारंभ विधि विधान बनाकर तत्कालीन मुनि श्री जयत विजय जी मधुकर ने राणापुर चातुर्मास के दौरान प्रारंभ की थी जो आज तक प्रारंभ हे। तरुण परिषद के राष्ट्रीय सदस्य अवि सकलेचा ने बताया की त्रिस्तुतिक आमनाय की श्रद्धा के केंद्र गुरुदेव श्री मद विजय जयंत सेन सूरीजी ने अपने राणापुर चातुर्मास में इस नवकार आराधना की शुरुआत की थी जो धीरे धीरे भारत के 13 प्रदेशों के साथ जापान,अमेरिका में भी सावन सुदी सप्तमी से पूर्णिमा तक 9 दिवसीय की जाती है। इस आराधना में प्रत्येक आराधक को नमस्कार मंत्र की 20 माला रोज गईनी जाती है तथा जैन पदती से एकासना करना होता है। दो समय प्रतिक्रमण और तीन समय देव वन्द्न करना होते है। एक आराधक पूरे 9 दिन में करीब 20 हजार मंत्र का जाप करता है इसी प्रकार पूरे देश में लगभग करोड़ो मंत्रो का जाप इन नो दिनों में होता है।नमस्कार महामंत्र में विश्व के सभी अरिहंत, सिद्ध, आचार्य और साधुओं को नमस्कार किया गया हे। राणापुर नगर में ओसवाल समाज और श्री मुनि सुवर्त समाज द्वारा पूज्य गच्छाधिपति श्री मद नित्य सेन सूरीजी और श्री मद जय रत्न सूरीजी के आशीर्वाद से आराधना की स्थापना की गई हे। महा मंगलकारी इस आराधना में आराधक भाग ले रहे हे।





