₹2 हजार की रिश्वत ने उतार दिया ईमान का मुखौटा, लोकायुक्त के जाल में फंसा पटवारी
फार्मर आईडी में नाम दर्ज करने के एवज में मांगी थी रिश्वत, किसान की शिकायत पर रंगे हाथों हुई कार्रवाई

पेटलावद/सारंगी । राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार पर एक और बड़ा प्रहार करते हुए लोकायुक्त पुलिस इंदौर ने पेटलावद तहसील की उप तहसील सारंगी के ग्राम मोहनपुरा में पदस्थ पटवारी संजय अमलियार को 2 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। मामूली राशि की रिश्वत के लिए सरकारी कर्मचारी का लोकायुक्त के जाल में फंसना पूरे राजस्व अमले के लिए बड़ा संदेश माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, मोहनपुरा निवासी किसान पुनिया भूरिया अपनी कृषि भूमि के एक सर्वे नंबर को फार्मर आईडी में दर्ज कराने के लिए कई दिनों से कार्यालय के चक्कर लगा रहा था। आरोप है कि काम करने के बदले पटवारी ने उससे 2 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। परेशान किसान ने इसकी शिकायत लोकायुक्त पुलिस इंदौर से कर दी।
लोकायुक्त ने शिकायत का सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर पूरी योजना बनाई गई। गुरुवार को उप तहसील सारंगी कार्यालय के मीटिंग हॉल में जैसे ही किसान ने आरोपी पटवारी को रिश्वत की राशि सौंपी, पहले से मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।
पटवारी की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया। कार्यालय में मौजूद अधिकारी-कर्मचारी भी अचानक हुई कार्रवाई से सकते में आ गए। लोकायुक्त टीम ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा-7 के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
किसानों के लिए बड़ा संदेश
यह कार्रवाई उन किसानों के लिए राहतभरी मानी जा रही है जो छोटे-छोटे राजस्व कार्यों के लिए रिश्वत मांगने की शिकायत करते रहे हैं। लोकायुक्त ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी शासकीय अधिकारी या कर्मचारी किसी कार्य के बदले अवैध राशि की मांग करता है, तो उसकी सूचना तत्काल लोकायुक्त को दें ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।
लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगने वालों पर कानून की नजर लगातार बनी हुई है और शिकायत मिलने पर कार्रवाई से कोई भी नहीं बच सकेगा।





