बैकुंठ धाम में गुरु पूर्णिमा पर उमड़ा आस्था का सैलाब – श्रद्धालुओं ने गुरु पादुका पूजन कर लिया आशीर्वाद
मध्यप्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र व राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में पहुंचे गुरु भक्त

मध्यप्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र व राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में पहुंचे गुरु भक्त
थांदला । पूज्य सरस्वती नन्दन स्वामी गुरुदेव की तपोभूमि श्री सरस्वती नन्दन स्वामी भजनाश्रम वैकुंठ धाम, गुरुधारा-थांदला पर गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर आस्था और श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। मध्यप्रदेश के साथ ही गुजरात, महाराष्ट्र एवं राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में गुरु भक्त बैकुंठ धाम पहुंचे और गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं ने विधिवत सद्गुरु पादुका पूजन कर गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रातःकाल से ही बैकुंठ धाम में भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण नजर आया।

महोत्सव के अंतर्गत प्रातः 4 बजे महाभिषेक, प्रातः 6 बजे मंगल आरती, प्रातः 8 बजे सद्गुरु पादुका पूजन तथा दोपहर 12 बजे महाआरती एवं महासादी का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने परिवार सहित आयोजन में सहभागिता कर पुण्यलाभ लिया।
इनकी रही प्रमुख भूमिका
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के आयोजन में राजेन्द्र अभिहोत्री — अध्यक्ष, न्यास मंडल एवं भक्त मंडल, भूदेव आचार्य — आश्रम प्रभारी, श्रीरंग आचार्य — उपाध्यक्ष, भागवतप्रसाद शुक्ल — कोषाध्यक्ष तथा डॉ. जया पाठक — सचिव सहित अन्य पदाधिकारियों एवं भक्त मंडल के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

वहीं तुषार भट्ट, दीपक आचार्य एवं वीरेंद्र आचार्य — संयोजक के रूप में आयोजन की व्यवस्थाओं में सक्रिय रहे। न्यास मंडल एवं व्यवस्था मंडल से जुड़े वासुदेव सोनी, ओमप्रकाश बैरागी, गणपतिलाल बैरागी, सत्यप्रकाश परमार, दिनेशचन्द्र उपाध्याय, ईश्वरचंद वाणी, जगदीश चारिया, जगदीश आचार्य, ज्ञानदेव आचार्य, केदारभाई, प्रदीप अत्रोचा, नन्दीव आचार्य, अरविंद चौहान, किशोर आचार्य, राजेन्द्र भट्ट, चिंटूभाई बैरागी, आकाश सोनी, राजू शाह, हि.सिंह आचार्य, ज्ञानेश्वर भट्ट, महिमा त्रिवेदी, गोविंद विट्ठल बैरागी, सतीश सोनी, गर्व किशोर आचार्य, शिवराम नागर, अनिल पाठक, राहुल आचार्य एवं मयंक आचार्य सहित समस्त भक्त मंडल ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया।
गुरु पूर्णिमा के इस पावन पर्व पर बैकुंठ धाम गुरुदेव की तपोभूमि में आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहा। दूर-दराज से आए गुरु भक्तों ने गुरु पादुका का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और गुरु कृपा को अपने जीवन का सबसे बड़ा संबल बताया। पूरे आयोजन के दौरान बैकुंठ धाम का वातावरण गुरु भक्ति और श्रद्धा से ओतप्रोत रहा।





