
तेजमल गाहरी
राणापुर । श्री त्रिस्तुतीक जैन संघ के सानिध्य में श्री सुविधिनाथ ऐव मुनिसुवृत स्वामी जिनालय से प्रभुजी का वरघोड़ा निकाला गया जो नगर भ्रमण करते हुए मंदिरों में आरती के पश्चात समाप्त हुआ। श्वेतांबर संप्रदाय में कार्तिक सुदी 14 चातुर्मास समाप्ति के एक दिन बाद आने वाली पूर्णिमा पर श्री पालीताणा तीर्थ की यात्रा की जाती हे।श्री सिमंधर धाम पर स्थापित श्री सिद्धांचल पट्ट पर जयंत गिरी की भाव यात्रा स्वरूप विधान किया गया जिसे कमलेश कटारिया ने सम्पन्न कराया। आरती उतारी गई।
श्री सिमंधर धाम पर परिषद की स्थापना अवसर पर परिषद का ध्वजारोहण तरुण परिषद ओर महिला परिषद की अनीता बाठिया और अवि सकलेचा ने किया। परिषद गीत का वाचन किया गया। भावयात्रा ओर ध्वजारोहण कार्यक्रम का संचालन राजेंद्र सियाल ने किया। संघ अध्यक्ष दिलीप सकलेचा ने भी ध्वजारोहण में सहभागिता की। सुरेश समीर ने परिषद ओर वर्तमानाचार्य श्री के प्रति अपनी आस्था बनाए रखने का आव्हान किया। राजेंद्र सियाल ने कहा कि आचार्य श्रीमद विजय जयंतसेन सूरीजी की राणापुर कर्म स्थली रही हे। वे अपने अंत समय तक राणापुर चातुर्मास की भावना को मन में दबाकर हमसे दूर हो गए। उनका राणापुर के प्रति इतना वात्सल्य था कि वे राणापुर के लाल को आचार्य के रूप में स्थापित कर गए जिससे राणापुर का नाम पूरे हिंदुस्तान में चमका हे।श्रीमद नित्यसेन सूरीजी ही हमारे राणापुर त्रिस्तुतिक संघ के सर्व मान्य आचार्य हे और रहेंगे।
राणापुर संघ के धार्मिक कार्य प्रतिष्ठा आदि पुण्य सम्राट श्री की पाट परम्परा के सानिध्य में होगी।हमारी श्रद्धा और आस्था से विपरीत कोई आचार्य श्री, मुनि साध्वी मंडल पधारते हे तो उनका स्वागत अभिनंदन ओर व्यवस्था होगी जो संघ का कर्तव्य हे। राजेंद्र सियाल ने इस संदेश के माध्यम से कहा कि त्रिस्तुतिक संघ के शिर मोर जयंतसेन सूरीजी के प्रति समस्त मुनि मंडल साध्वी मंडल ऐव संघ के पदाधिकारी तथा सदस्य उनकी आणा का ख्याल रखे। आभार अवि सकलेचा ने माना।





