ज्ञान की कमी के कारण जीवन में पैदा होता है अहंकार – मुनि पवित्ररत्न विजयजी
हम प्रवचन में तो बैठते है, लेकिन प्रवचन को हमारे अंदर नहीं बैठाते है - मुनि प्रत्यक्षरत्न विजयजी

सौरभ खेमसरा
मेघनगर । पुण्य सम्राट गुरुदेव श्रीमद विजय जयंतसेन सुरीश्वरजी महाराजा के शिष्य एवं वर्तमान गच्छाधिपति श्रीमद विजय नित्यसेन सुरीश्वरजी और आचार्य श्रीमद विजय जयरत्न सुरीश्वरजी के आज्ञानुवर्ती पूज्य मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्न बिजयजी एवं श्री पवित्ररत्न विजयजी महाराज साहब का आज मेघनगर में प्रातः 7.30 बजे मंगल प्रवेश हुआ। स्थानीय श्रीसंघ द्वारा साईं चौराहा से बाजे गाजे के साथ मुनि भगवन्तों का नगर प्रवेश कराया।

प्रवेश का वरघोड़ा दशहरा मैदान, शांति सुमतिनाथ मंदिर, आजाद चौक, गौडीजी होता हुए ज्ञान मंदिर पहुंचकर धर्मसभा में परिवर्तित हो गया जहां मुनिराज प्रत्यक्षरत्नजी ने अपने प्रवचन में फरमाया कि, हमारा दिल शुद्ध होना चाहिए क्युकी जिनका दिल शुद्ध होता है, परमात्मा भी वही वास करते है। साथ ही उन्होंने कहा कि, हम उपाश्रय जाते है, प्रवचन में बैठते तो है, पर उन्हें अपने अंदर नहीं बैठाते इसीलिए हम भटक रहे है। मुनिराज पवित्ररत्न विजयजी ने कहा कि, हमे व्यावहारिक ज्ञान तो बहुत है, लेकिन हम धार्मिक ज्ञान से दूर है, जब तक हमारे में धर्म का ज्ञान नहीं होगा तब तक हमारे भीतर अहंकार बना रहेगा और हम परम पद को प्राप्त नहीं कर सकेंगे। प्रवचन के बाद सकल संघ की नवकारसी का भी आयोजन किया गया। उक्त जानकारी देते हुए संघ अध्यक्ष शांतिलाल लोढ़ा ने बताया कि पूज्यश्री अहमदाबाद से नागदा जंकशन चातुर्मास हेतु विहाररत है और उसी क्रम में आज नगर में आगमन हुआ है। परिषद अध्यक्ष देवेंद्र जैन ने बताया कि, दोपहर में स्थानक में विराजित पूज्य श्री धर्मेन्द्रमुनिजी महाराज साहब के वंदन कर उनसे पूज्य मुनि भगवन्तों ने ज्ञानचर्चा भी की। तरुण परिषद अध्यक्ष गोलू जैन ने बताया कि 18 मई को पूज्यश्री का झाबुआ की ओर विहार होगा। कार्यक्रम का संचालन रजत कावड़िया ने किया।





