

तेजमल गाहरी
राणापुर । श्वेतांबर जैन समाज के पर्युषण पर्व शनिवार से प्रारंभ हुए । इस महापर्व के उपलक्ष्य में नगर एक तीनो श्वेतांबर मंदिरो में आकर्षक सजावट की गई । शनिवार सुबह से ही मंदिरो में भगवान के पक्षाल, केसर पूजन, आरती, स्नात्र पूजन आदि के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे । पर्युषण पर्व के लिए पारा में चातुर्मास कर रहे साध्वी श्री देशना निधि एवम साध्वी अर्हमनिधि श्री राजेंद्र भवन एवम श्री मुनिसुव्रत स्वामी जिनालय में शास्त्र वाचन एवम व्याख्यान हेतु पहुंचे है । शनिवार को प्रथम दिन श्री मुनिसुव्रत जिनालय में पक्षाल, केसर पूजन, आरती आदि की बोलिया हुई विभिन्न लाभार्थियों ने लाभ लिए । शास्त्र जी को मनोहरलाल नाहर के निवास से ढोल के साथ चारित्र आराधना भवन लाया गया । यहा साध्वी अर्हमनिधी ने अपने प्रवचन में पर्युषण पर्व के बारे में विभिन्न जानकारी देते हुए पर्युषण पर्व के दौरान जप,तप आदि क्रियाएं करने की बात कही । उन्होंने श्रावक के पांच कर्तव्यों के बारे में जानकारी दी । साथ ही पांच बल के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा की श्रावक को कम से कम पर्युषण पर्व तथा पंचमी को सुबह एवम शाम का प्रतिक्रमण अवश्य करना चाहिए । पर्युषण पर्व के प्रथम दिन श्री मुनिसुव्रत जिनालय में सुबह शाम के प्रतिक्रमण हुए जिसमे प्रभावना मोतीलाल कटारिया, सज्जनलाल कटारिया परिवार ने की । दोपहर में श्री मुनिसुव्रत पंच कल्याणक पूजन कमलेश कटारिया एवम दिनेश नाहर की ओर से श्री पार्श्व संगीत मंडल ने पढ़ाई । शाम को भगवान की आकर्षक अंग रचना की गई लाभार्थी राजेंद्र कटारिया एवं रात्रि में आरती पश्चात प्रभु भक्ति की गई ।





