दान देकर उसका स्मरण भी मन में ना रहे,वही सर्वत्र दान है: साध्वी श्री रत्नरेखा श्रीजी
श्री संघ की ओर से महावीर जैन का बहुमान किया गया

झाबुआ । स्वाध्याय करने की कोई उम्र नहीं होती है स्वाध्याय जैसे-जैसे करते जाते हैं वैसे-वैसे उसकी भावना बढ़ती जाती है स्वाध्याय ही जप, तप एवं क्रिया है। सर्वस्व दान क्या होता है? गर्व के साथ अभियान के साथ किए गए दान का कोई महत्व नहीं होता है दान देकर पश्चाताप नहीं करना, दान देकर उसको जाहिर नहीं करना, दान देने के पश्चात उस दान के प्रति अपना अधिकार, नाम सभी हक समाप्त हो जाए यहां तक की मन से भी उसे दान के प्रति स्मरण भुला दे तब वह सर्वस्त्र दान होता है उक्त प्रवचन धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य साध्वी जी श्री अनुभवदृष्टा श्री जी महाराज साहेब ने श्री बावन जिनालय उपाश्रय पर महावीर जैन मोगरा के सम्मान समारोह के अवसर पर कहे।*पूज्य साध्वी श्री कल्पदर्शिता श्रीजी महाराज साहेब ने कहा कि प्रभु ने जिस पथ को प्रशस्त किया उस पर हम सभी चलकर अपनी आत्मा का कल्याण करें, परमात्मा की उस छवि को हम अपनी अंतरात्मा में उतारे*
श्री संघ के रिंकु रूनवाल ने बताया कि श्री ऋषभदेव 52 जिनालय उपाश्रय पर साध्वी श्री रत्नरेखा श्री जी महाराज साहेब के सानिध्य में श्री संघ के महावीर जैन के सेवानिवृत्ति होने पर प्रवचन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया इस अवसर पर श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता ने अपने उद्बोधन में श्री जैन के सेवाकाल की सराहना करते हुए कहा कि श्री महावीर जैन ने धर्ममय प्रामाणिक एवं धर्म में आराधना करते हुए भी आपने पूरी ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन किया व सेवानिवृत्ति के पश्चात सम्मान समारोह को भी आपने धर्ममय बना दिया। श्री संघ के वरिष्ठ अशोक कटारिया, डॉ प्रदीप संघवी, संजय काठी यशवंत भंडारी कमलेश कोठारी, अरविन्द जैन आदि ने श्री जैन के सेवाकाल एवं धर्म सेवाओं व सामाजिक कार्यों की प्रशंसा की। इस अवसर पर उनके पुत्र गौरव जैन एवं भानेज संदीप भैया ने संस्मरण सुनाते हुए श्री जैन के बारे में कहां की वे अपनी जिम्मेदारी को पूर्ण ईमानदारी के साथ पूरी करते रहे हैं।
जैन श्वेतांबर श्री संघ, मालवा महासंघ, विघ्नहरा पार्श्वनाथ जैन ट्रस्ट , सकल व्यापारी संघ, आचार्य श्री तीर्थेंद्र सुरी समिति, श्री महावीर बाग ट्रस्ट, परिषद परिवार, शिक्षा विभाग आदि के पदाधिकारी द्वारा श्री महावीर जैन का बहुमान शाल श्रीफल एवं तिलक निकाल कर किया गया।





