महान तपस्वी, सिद्ध संत श्री जगदीश भारती जी महाराज का देवलोक गमन
सनातन साधना परंपरा का एक दिव्य अध्याय पूर्ण

कैलाश परमार
कुशलगढ़ । सनातन धर्म की अखंड साधना परंपरा के महान तपस्वी, सिद्ध संत, त्याग और तप के प्रतीक श्री श्री श्री 10008 श्री संत शिरोमणि श्री जगदीश भारती जी महाराज — “टाट वाले बाऊजी / लोंग इलायची वाले बाऊजी” की वैकुंठ यात्रा (देवलोक गमन) दिनांक 21 दिसम्बर 2025 को प्रातः 9:40 बजे धरणीप्रभा फार्म हाउस, कुशलगढ़ में हुआ। उनके देवलोक गमन से संपूर्ण क्षेत्र, श्रद्धालुओं, शिष्यों एवं साधक समाज में गहन शोक व्याप्त है।
गुरुदेव एक साधारण संत नहीं, बल्कि तप, त्याग और सिद्धि की जीवंत परंपरा थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में देश के विभिन्न धार्मिक व सिद्ध स्थलों पर कुल 12-12 वर्षों की अखंड तपस्या कर सनातन साधना की दुर्लभ ऊँचाइयों को स्पर्श किया।
मध्य प्रदेश स्थित काला कुंड की गुफा में गुरुदेव को लगभग 80 वर्ष पूर्व मातेश्वरी के साक्षात दर्शन प्राप्त हुए, जो उनकी दिव्य साधना का प्रमाण माने जाते हैं।
कुशलगढ़-नागदा स्थित बिजलेश्वर महादेव की गुफा में भी गुरुदेव ने 12 वर्षों की कठिन साधना की। वे कहा करते थे कि इस गुफा में आज भी एक 700 वर्ष आयु के दिव्य सिद्ध संत सूक्ष्म रूप में विद्यमान हैं, जो साधकों का मार्गदर्शन करते हैं। इसके अतिरिक्त कोठारिया की गुफा में भी उन्होंने 12 वर्षों की अखंड साधना कर सिद्धि प्राप्त की।
गुरुदेव की कुशलगढ़ स्थित श्री नागनाथ महादेव मंदिर में विशेष आस्था थी। इसके साथ ही उनका देशभर के अनेक प्रख्यात धार्मिक स्थलों पर निरंतर आध्यात्मिक प्रवास रहा, जिनमें प्रमुख रूप से —
बिलकेश्वर महादेव, रामेश्वर महादेव, देवझर महादेव, धूमलेश्वर महादेव, चामुंडा माता (बूँदी), ढोबरा महादेव, सिंगोली श्याम, कालदा माताजी, चौथ भवानी, डाटूंदा माताजी, आवरी माताजी, चित्तौड़गढ़ स्थित कालिका माता व जोगणिया माताजी, 64 जोगणिया माताजी (सरोना), अम्बा माता व सीता माता अभ्यारण्य (प्रतापगढ़), काली देवी, कोटेश्वर महादेव, पाताल पानी की गुफा (मध्य प्रदेश), ओंकारेश्वर महादेव, उज्जैन महाकाल मंदिर, नंदनी माता (बड़ोदिया), चकलेश्वर महादेव स्वयंभू (चोखला), मदारैश्वर महादेव (बांसवाड़ा) सहित देवली, अलवर, डूंगरपुर, अरथूना, कोटा, टोंक, राणापुर, रतलाम, सेलाना, मंदसौर एवं देश के अनेक सिद्ध एवं धार्मिक स्थल सम्मिलित हैं।

गुरुदेव का जीवन सादगी, मौन तप, करुणा और सेवा का अनुपम उदाहरण था। वे न किसी वैभव के आकांक्षी थे, न ही प्रसिद्धि के — उनका समूचा जीवन साधना और लोककल्याण के लिए समर्पित रहा।
गुरुदेव को कुशलगढ़ स्थित श्री नागनाथ महादेव मंदिर परिसर में सैकड़ों श्रद्धालुओं एवं भक्तों की उपस्थिति में विधिवत समाधि प्रदान की गई। वातावरण “ॐ नमः शिवाय” “ॐ नमो नारायण” और “जय महाकाल” के उद्घोष से गूंज उठा, जिससे सम्पूर्ण क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया। गुरुदेव भले ही देह रूप में हमारे बीच नहीं रहे, परंतु उनके उपदेश, तप की शक्ति और आध्यात्मिक चेतना सदैव शिष्यों एवं श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करती रहेगी। उनका देवलोक गमन सनातन परंपरा के एक दिव्य अध्याय की पूर्णाहुति है।
ब्रह्मलीन गुरुदेव की शोडशी क्रिया महाप्रसादी दिनांक 5 जनवरी, 2026 सोमवार को कुशलगढ़ के श्री नागनाथ महादेव मंदिर पर प्रातः 11:00 बजे होंगी। जहाँ भक्त अपने गुरु को श्रद्धांजलि प्रदान करेंगे।
ॐ शांति। ॐ शांति। ॐ शांति।





