संयम मार्ग इतिहास का नहीं गणित का प्रश्न पत्र है, एक अंक गलत लिखा परिणाम शून्य में बदल जाता है: साध्वी प्रमिलाजी
संयम मार्ग अनुकंपा का श्रेष्ठ मार्ग है: मुमुक्षु अंजलि भंडारी

धर्मेश सोनी
पेटलावद । संयम मोक्ष मार्ग पर चलने व पहुंचने का साधन है।सिद्ध पद पाने का अवसर है। विषयों व जड़ पदार्थ के प्रभाव से मुक्त होने का प्रयास है । संयम इतिहास का नहीं है गणित का प्रश्न पत्र है एक भी अंक कि भूल चूक परीक्षार्थी को शून्य अंक पर पहुंचा देती है।
उक्त बात साध्वी प्रमिला जी ने मुमुक्षु अंजलि बहन भंडारी के सम्मान में श्री संघ पेटलावद द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में कही। आपने कहा कि इतिहास के प्रश्न पत्र में थोड़ा लिखो तो भी कुछ ना कुछ अंक मिल ही जाते हैं। संयम ज्ञान दर्शन चारित्र रत्न त्रय को प्राप्त करने का अवसर है। इस मार्ग पर चलते ही रहना है रुकना नहीं थकना नही सिर्फ सम्यक पुरुषार्थ करना है।
मुमुक्षु अंजलि भंडारी ने कहा संसार में रहकर पाप से नहीं बच सकते हैं। संयम पापों से बचने का श्रेष्ठ साधन है। संयम अनुकंपा का श्रेष्ठ मार्ग है। अनंत में लीन होने का मार्ग है व मोक्ष पाने काश्रेष्ठ अवसर हे। पेटलावद का धार्मिक शिविर आज भी मेरी स्मृति में अंकित है।

14 नवंबर को रतलाम पधार कर मेरी दीक्षा के आप सभी साक्षी बने। श्री संघ कि और से नीरज जैन ने स्वागत व शुभकामना भाव व्यक्त किए। श्री संघ कार्यवाहक अध्यक्ष मणिलाल चाणोदिया, पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र कटकानी, नरेंद्र मोदी, संघ संवाददाता जितेंद्र मेहता, कोषाध्यक्ष विमल मोदी ,सह कोषाध्यक्ष संतोष गुजराती, बहू मंडल अध्यक्ष श्रीमती संगीता मेहता, महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती आशा भंडारी ने चांदी के सिक्के माला व शाल ओढा कर मुमुक्षु का सम्मान किया। वीर माता श्रीमती सुशीला भंडारी वीर पिता महेन्द्र भंडारी एवं परिजनों का भी श्री संघ द्वारा सम्मान किया गया। साध्वी ज्योतिषमति जी ने मंगल पाठ सुनाया। इस अवसर पर अशोक मेहता, रोहित कटकानी, दीपक सोलंकी, ऋषभ कटकानी, चेतन कटकानी संयम भंडारी, शुभम सोलंकी, संतोष मेहता, ज्ञानमल भंडारी, मांगीलाल कोठारी, श्रीमती विमला देवी बरबेटा, मनोरमा मेहता, वंदना सोलंकी, दीपांशी भंडारी ,आजाद भंडारी, संतोष वी भंडारी एवं पाठशाला के बच्चों सहित कई श्रावक श्रावीका उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि। कुमारी अंजली भंडारी 14 नवंबर 2025 को रतलाम शहर में धर्मदास गणनायक प्रवर्तक श्री जिनेंद्र मुनि जी महाराज साहब के मुखारविदं से दीक्षा ग्रहण करने जा रही है। संचालन सोहनलाल चाणोदीया ने किया।





