

थांदला – 16 मई को जयस का 11 वाँ जयस स्थापना दिवस थांदला जयस द्वारा मनाया, स्थापना दिवस पर जयस पदाधिकारी व कार्यकर्ता द्वारा बिरसा मुंडा जी मूर्ति पर माल्यापर्ण किया गया ।जिससे जयस के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे जयस जिला कार्यकारी अध्यक्ष बलवेंद्रसिंह वसुनिया, ब्लाक प्रभारी मदन डामोर,दीपेंद्र गरवाल,दिनेश सिंगाड़ , संतोष डामोर, माहिम मगन गहलोत, विनोद भूरिया ,मंगलसिंह, टीटा, दितमल, चरणसिंग, राजेश सिंगाड़, अजय,दिलीप,राजेश,आदि उपस्थित रहे ।
आज के इस आधुनिक युग में आदिवासी समुदाय को एक स्वतंत्र युवा विचारधारा की आवश्यकता है, जो काफी हद तक जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) से संभव हुई है। जयस जो भगवान बिरसा मुंडा जी, टंट्या मामा जी, बाबा साहब जी के सपनों को पूरा करने के लिए विचारधारा पर कार्य करता है। जयस की स्थापना 16 मई 2013 को मध्यप्रदेश के युवाओं द्वारा मिलकर की गई है। जयस एक स्वतंत्र सामाजिक युवाओं का संगठन हैं। जो पांचवी छठी अनुसूची, पेसा एक्ट, शिक्षा, स्वास्थ्य, कुपोषण, बेरोजगारी, शोषण, अत्यचार, के खिलाफ खुलकर आवाज़ उठाता है। वर्तमान समय जयस के कार्यकर्ता देश में आवाज बुलंद करते हुए कार्य कर रहे है।
आदिवासी युवाओं का जोश और जुनून बना जयस
जयस आज हर आदिवासी युवाओं का जोश और जूनून बन गया है।जयस की विचारधारा से सभी आदिवासी युवा प्रेरित है…।जयस अपने समाज में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए,अपने संवैधानिक अधिकारों की पूर्ण प्राप्ति और समाज की समृद्धि के लिए समय समय पर जागरूकता रैलियों,सभाओं तथा चिंतन शिविरों का आयोजन करता रहता है।जयस अपनी संस्कृति,रीति रिवाजों को बचाने के लिए काम कर रहा है।जयस बिखरे हुए आदिवासी समाज को संगठित करने के लिए काम कर रहा है।जयस संविधान के दायरे में अपनों की आवाज सरकार तक पहुंचाने का काम करता है।जयस आज हर आदिवासी युवा के सर चढ़कर बोल रहा है और एक ऐसी क्रांति का आगाज हो गया है जो 21वीं सदी में एक इतिहास लिखकर जाएंगे..।





