धर्म की धारा माही सागर सरदारपुर धार्मिक आस्था का केंद्र
सैकड़ो की संख्या में धार झाबुआ अलीराजपुर जिलों के विभिन्न क्षेत्रों से आ रही वनवासी महिलाएं हो रही सिद्ध मनोकामनाएं

योगेश गवरी
सरदारपुर । पुरानी मान्यता के अनुसार जिस प्रकार मां गंगा सभी पापियों के पाप को तारती है उसी प्रकार माही तट मन माही की परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु की सभी मनोकामना पूर्ण होती है कई महिला श्रद्धालुओं से पूछने पर बताया गया, कि अपने बच्चों के स्वास्थ्य बुद्धि एवं रक्षा और उनके वैवाहिक मनोकामना मांगी गई मान मन्नतो को लेकर की जा रही पूजा एवं उपवास को माँ माही स्वीकार कर रही है, और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो रही है इसी कड़ी में महिलाओं ने बात करने पर बताया कि यदि किसी महिला के दो लड़के हैं तो उन्हें दो उपवास रखना चाहिए एवं उसी के निमित्त दो बार पूजा करना चाहिए है और एक उपवास माँ माही के लिए रखना है कुल तीन उपवास का संकल्प करके फिर यह पूजा दूसरी महिलाओं को देना है, इसी प्रकार किसी महिला के यदि एक कन्या संतान है तो एक उपवास उस कन्या के लिए करना है और एक माही माता के लिए करना है, इस प्रक्रिया में महिलाएं दूर दराज क्षेत्र से माही में आकर स्नान करती है, और घाट पर स्थित माही माता के मंदिर पर पूजन अर्चन करके श्रीफल भेंट करती है और मन्नत का धागा मां के द्वार पर बांधती है और प्रसाद वितरण करके पुण्य सलीला माही के जल को ले जाकर अपने निवास स्थान के समीप स्थित माताजी मंदिर पर जाकर जल अर्पण करती है, महिलाओं ने बताया कि हम पिछले कई वर्षों से आ रही है माही के जल को ले जाकर अपने निवास स्थान के समीप स्थित माताजी मंदिर पर जाकर जल अर्पण करती है, संवाद के दौरान इन महिलाओं ने बताया कि हम पिछले कई वर्षों से आ रही है और हम सभी की माही माता हमारी सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर रही है। श्रद्धा और विश्वास के साथ हो मागी रही सारी मनोकामनाएं पूर्ण।
श्रद्धा और विश्वास
महिलाएं बताती हैं कि वे पिछले कई वर्षों से माही सागर आ रही हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हुई हैं। वे माही माता की पूजा-अर्चना कर अपनी श्रद्धा और विश्वास को प्रकट करती हैं।





