निर्मला प्रकाशचंद्र बोथरा का संथारा सहित देवलोक गमन
समाजजनों ने डोल निकाल कर दी अंतिम विदाई

थांदला । जैन धर्म में आराधकों का अंतिम मनोरथ होता है कि वह कब 18 पाप, 4 आहार व शरीर का त्याग कर सभी जीवों से क्षमा का आदान प्रदान करते हुए समाधि पूर्वक मरण को प्राप्त करेगा। विरली आत्मा होती है जिनकी भय रहित मरण की यह मनोकामना पूर्ण होती है। थांदला में प्रतिष्ठित स्व. बलवंतराय बोथरा की पुत्रवधु व प्रकाशचंद्र की धर्म सहायिका धर्मनिष्ठ सुश्राविका श्रीमती निर्मला देवी बोथरा का संथारा सहित देवलोक गमन 11 अप्रैल 2026 शनिवार को शाम 7:30 बजे के करीब हो गया। आपने यहाँ विराजित पूज्या महासती श्री निखिलशीलाजी म.सा. के मुखारविंद से चेतन अवस्था में चारों आहार का त्याग करते हुए पंडित मरण (संथारा) के प्रत्याख्यान ग्रहण किये थे जो करीब 40 मिनट में सिझा। उनके पंडित मरण पर जैन समाज ने उनकी डोल निकालकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। डोल यात्रा एक दिन बाद प्रातः 9 बजे उनके निवास स्थान से निकाली गई जिसमें संघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया, सचिव हितेश शाहजी, कोषाध्यक्ष रजनीकांत शाहजी, पूर्व अध्यक्ष भरत भंसाली, रमेशचन्द्र चौधरी, महेश व्होरा, जितेंद्र घोड़ावत, अनोखीलाल मोदी, सुजानमल शाहजी, यतीश छिपानी, आशीष कांकरिया, धर्मेश छाजेड़, लायन्स क्लब अध्यक्ष चिराग घोड़ावत, जीवदया अभियान के पवन नाहर, मनोज जैन, रवि लोढ़ा आदि अनेक समाजसेवी जैन जेनेत्तर बंधुओं व परिजन शामिल हुए। संथारा साधिका को मुखाग्नि उनके पति प्रकाशचंद्र, देवर सुभाषचंद्र, दोनों पुत्र सचिन एवं नितेश (टीनू) बोथरा व परिजनों ने दी। अंतिम संस्कार स्थल पर उनके शीघ्र मोक्ष गमन की कामना के लिए 2 लोगस्स का ध्यान किया गया।





