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थांदला के नन्दनों सहित 8 ठाणा का हुआ मंगल प्रवेश

गुरुभक्ति में उमड़ा जन सैलाब, चारों तरफ लगे आस्था व भक्ति के नारें

थांदला । चरम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के चातुर्मास के रूप में बताए गए संत-सतियों के सबसे बड़े कल्प को लेकर जिन शासन के संघों में आपार उत्साह का वातावरण रहता है ऐसे में वे संघ अपने आपको भाग्यशाली मानते है जहाँ संत – सती चातुर्मास कल्प का निर्वहन करने चार माह एक ही स्थान पर रहते है। जैनाचार्य पूज्य श्री जवाहरलालजी व जिन शासन गौरव जैनाचार्य पूज्य गुरुदेव उमेशमुनिजी की जन्म स्थली थांदला से 50 के लगभग संत दीक्षित होकर जिन शासन की प्रभावना कर रहे है ऐसे में थांदला संघ की भावना थी कि पूज्य श्री धर्मदास सम्प्रदाय में दीक्षित थांदला के समस्त संतों का सामुहिक रूप से एक वर्षावास थांदला उनकी जन्मस्थली थांदला में हो लेकिन प्रवर्तक देव श्री जिनेन्द्रमुनिजी म.सा. ने अन्य क्षेत्रों की मांग व संतों की अल्पता के कारण सभी संतों का तो नही परन्तु उनमें से तत्वज्ञ संघ हित चिंतक पूज्य श्री धर्मेंद्रमुनिजी, रोचक वक्ता सन्दीपमुनिजी, जयन्तमुनिजी, प्रश्स्तमुनिजी, सुयशमुनिजी, प्रसन्नमुनिजी, श्रेयांशमुनिजी व गौरावमुनिजी आदि ठाणा – 8 का चातुर्मास प्रदान कर महती कृपा की। उल्लेखनीय है कि इन संतों में 3 सगे भाई व एक पुत्र है जबकि एक थांदला का नातिन है। आप सभी के चातुर्मास कल्प पर थांदला में आज भव्य प्रवेश पर पूरा श्वेतांबर दिगम्बर संघ उमड़ पड़ा वही पूरे रास्ते उत्साह उमंग के साथ थांदला नगर में कौन पधारें – हम भक्तों के भगवान पधारें, संयम इनका सख्त है – तभी तो लाखों भक्त है, थांदला के नन्दन – कोटि-कोटि वंदन, ये आचार्य अणु के शिष्य है – हम भक्तों के भविष्य है जैसे गगनभेदी जयकारों को गुंजायमान नगर प्रवेश करवाया। इस अवसर पर श्री महावीर जैन पाठशाला के बच्चों ने नगर के प्रवेश द्वार पर स्वागतम आपका गुरुवर की धुन सुनाते हुए उन्हें नगर में प्रवेश करवाया। इस अवसर पर झाबुआ, मेघनगर, कल्याणपुरा, पेटलावद, खवासा, बामनिया, रतलाम, इंदौर, अहमदाबाद, दाहोद, कुशलगढ़, बांसवाड़ा आदि अनेक स्थानों से सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शामिल होकर गुरुदेव आदि सन्तो की भव्य अगवानी की। नगर में विराजित महासती पूज्य श्री निखिलशीलाजी आदि ठाणा भी गुरुदेव की भव्य अगवानी में पधारें सभी बाहर से आने वालें मेहमानों व स्थानीय संघजनों के नवकारसी श्रीसंघ द्वारा विश्राम गृह पर की गई। गुरुदेव का पूरे मार्ग पर जैन जेनेत्तर बंधुओं का वंदन-नमन करने का तांता सा लगा रहा। आपके आगमन में उमड़ा जन सैलाब पूज्य आचार्य भगवंत के 1997 व आप स्वयं के 2010 के वर्षावास की यादें ताजा कर गया।

पूज्य श्री के मंगल प्रवेश के साथ ही हुआ धर्म सभा का आयोजन

पूज्य श्री के स्थानीय पौषध भवन पर आते ही सकल संघजनों ने गुरुदेव के उग्र विहार की सुखसाता पूछी वही धर्म सभा का भी आयोजन हुआ जिसमें गुरुदेव तत्वज्ञश्री ने कहा कि संत-सतियों के लिए तो 12 ही माह चातुर्मास जैसे होते है क्योंकि वे नियमिय भगवान की आज्ञा में रहकर स्वाध्याय आदि धर्म क्रिया करते ही रहते है परंतु चतुर्मास का सही लाभ तो स्थानीय संघजनों को उठाने की जरूरत होती है। आपने कहा कि तप त्याग से जीवन संयमित बनता है इसलिए आप सभी की भावना प्रवर्तक श्री की आज्ञा व योग से हम सभी संत चातुर्मास कल्प के लिए यहाँ आये है अब आप सभी खासकर युवा वर्ग धर्म से जुड़े व अपने जीवन को धर्म मय बनाने का प्रयास करें। इस अवसर पर आपने तप को कर्म क्षय का महत्वपूर्ण तत्व मानते हुए नन्दचक्र तप करने की प्रेरणा भी दी। इस अवसर पर रोचक वक्ता पूज्य श्री सन्दीपमुनिजी ने रोचक अंदाज में कहा की भगवान ने चातुर्मास कल्प में एक स्थान पर रहने की आज्ञा दी तो उसके पीछे कारण है। वास्तव में तो भगवान ने साधु को विहाररत रहने की ही प्रेरणा दी है उसके पीछे भी उनके कारण है उनमें से बड़े कारण तो समझ आने जैसे है कि एक स्थान पर रहने से राग-द्वेष व परिग्रह की प्रवृत्ति बढ़ने की संभावना रहती है अतः संत-सतियों को अकारण एक स्थान पर ज्यादा समय नही रुकना चाहिए। आपने कहा कि संत-सतियों के चातुर्मास की विन्नति प्रायः भगवान के समय से होती आई है परंतु वर्तमान में इसका चलन बढ़ गया है। आपने रोचक अंदाज में कहा कि आजकल लोग संत-सतियों को तो चातुर्मास में एक जगह बिठा देते है और स्वयं घूमने फिरने लग जाते है यहाँ तक कि विदेशों में जाने का चलन भी बढ़ गया है इसलिए संघजनों को भी चाहिए कि वे यदि संत-सतियों का वर्षावास करवाते है तो उसका भी पूरा लाभ उठाना चाहिए। सभा में पूज्य श्री निखिलशीलाजी म.सा. ने भी तत्वज्ञ श्री के सानिध्य में एक वर्षावास करने की अपनी भावना के सफल होने पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए गुरुदेव के मंगल प्रवेश को बधाया। अणु आराधना मण्डल ने मंगल गीत गाकर तो संघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने भी शाब्दिक उद्बोधन द्वारा गुरुभवंत के मंगल प्रवेश पर गुरुभवंत के उपकारों के प्रति आभार मानते हुए संघजनों को बधाइयां देते हुए सभी आयोजनों में शामिल होकर चातुर्मास को जप-तप-त्याग से मनाने का निवेदन किया। सभा का प्रभावशाली संचालन संघ सचिव हितेश शाहजी ने किया उक्त समस्त जानकारी संघ प्रवक्ता पवन नाहर ने दी।

Navinata Akhbaar
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