
सौरभ खेमसरा
मेघनगर । ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि के पावन अवसर पर आज स्थानीय प्रसिद्ध श्री शनि देव मंदिर में शनि जयंती का पर्व बेहद हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया है। इस उपलक्ष्य में मंदिर समिति द्वारा व्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया, जिसमें सुबह से ही भगवान शनिदेव के दर्शन और तेल अभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। पूरा मंदिर परिसर “जय शनि देव” और “ॐ शं शनैश्चराय नमः” के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
महा-अभिषेक और विशेष श्रृंगार से हुई शुरुआत
धार्मिक आयोजनों की शुरुआत अलसुबह ब्रह्ममुहूर्त में विद्वान पंडितों के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ की गई। सर्वप्रथम भगवान शनिदेव का पंचामृत स्नान कराया गया, जिसके बाद सरसों के तेल, गंगाजल और विभिन्न पवित्र औषधियों से महा-अभिषेक संपन्न हुआ।
दोपहर को बाबा शनिदेव का दिव्य श्रृंगार किया गया। नीले पुष्पों, आकर्षक पोशाक और विशेष छप्पन भोग के साथ भगवान का दरबार सजाया गया, जो भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा।
महायज्ञ में विश्व कल्याण की आहुतियां
शनि जयंती के विशेष उपलक्ष्य में मंदिर प्रांगण में **”नवग्रह शांति एवं मारुति महायज्ञ”** का आयोजन किया गया। मुख्य यजमानों सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने यज्ञ नारायण में आहुतियां डालकर क्षेत्र की सुख, समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की। पंडितों के अनुसार, शनि जयंती पर किए गए दान और हवन से साढ़ेसाती और ढैय्या के कुप्रभावों से मुक्ति मिलती है और जीवन में स्थिरता आती है।
श्रद्धालुओं के लिए की गई विशेष व्यवस्थाएं
भीषण गर्मी और धूप को देखते हुए मंदिर प्रशासन और स्थानीय सेवा समितियों द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए थे।छाया और शीतल जल श्रद्धालुओं को कतारों में असुविधा न हो, इसके लिए पूरे मार्ग पर टेंट (शामियाने) लगाए गए और ठंडे पानी की स्टॉल लगाई गईं।
विशाल भंडारे (महाप्रसाद) का आयोजन
धार्मिक अनुष्ठानों की पूर्णाहुति के पश्चात दोपहर से ही एक विशाल भंडारे का शुभारंभ हुआ, जो देर शाम तक अनवरत चलता रहा। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर शांतिपूर्वक महाप्रसाद ग्रहण किया। मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि शाम को महाआरती के बाद भजनों का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया है, जिसमें सुप्रसिद्ध भजन गायकों द्वारा शनि देव की महिमा का गुणगान किया जाएगा।





