सामूहिक क्षमा याचना व आगामी चातुर्मास के भावों को लेकर अणु दर्शन दर्शन यात्रा का आयोजन
थांदला जैन श्रीसंघ ने गोधरा, लीमड़ी, बांसवाड़ा व कुशलगढ़ विराजित संत-सतियों के किये दर्शन

थांदला । जैन समाज में चातुर्मास काल में पर्युषण पर्व के अंतिम दिन सँवत्सरीक प्रतिक्रमण द्वारा तीनों लोक की समस्त आत्माओं के साथ क्षमा याचना करने के पश्चात गुरु दर्शन के साथ उनसे व स्थानीय संघो से क्षमा याचना का दौर चलता है। इन्ही भावों के साथ थांदला से दीक्षित हुए समस्त संतों के आगामी वर्षावास की विन्नति को लेकर स्थानीय श्रीसंघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया व संघ सचिव हितेश शाहजी के नेतृत्व में पूर्व अध्यक्ष द्वय रमेशचंद्र चौधरी, महेश व्होरा, कोषाध्यक्ष रजनीकांत शाहजी, सन्तोष चपलौद, चंद्रकांत घोड़ावत, सुरेशचंद्र चौधरी, भूपेंद्र पावेचा, वीर भ्राता राजेन्द्र रुनवाल, वीर मित्र पवन नाहर, राजेश पोरवाल व नीलेश पावेचा सहित महिला मंडल के वरिष्ठ सदस्यों के साथ गोधरा (गुजरात) में विराजित संत रोचक वक्ता पूज्य श्री सन्दीपमुनिजी म.सा. आदि ठाणा – 4, लिमडी विराजित महासती पूज्या श्री कुसुमलताजी म.सा. आदि ठाणा – 4, बांसवाड़ा विराजित पूज्य श्री शुभेषमुनिजी म.सा. आदि ठाणा – 3 व कुशलगढ़ विराजित संघ हित चिंतक तत्वज्ञ पूज्य श्री धर्मेन्द्रमुनिजी म.सा. आदि ठाणा – 4 की सेवा में उपस्थित हुआ। सभी स्थानों पर विराजित संत व सतियों से सामूहिक वंदन्ना कर उनसे जिनवाणी का श्रवण किया। संघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने सकल संघ कि ओर से विगत वर्षों में हुई तीर्थ अशातना अभक्ति के लिए सभी से क्षमायाचना की संत-सतियों के साथ संघ जनों ने भी क्षमा का आदान प्रदान कर भगवान की अनमोल शिक्षा क्षमा भावों से अपने कर्मों का प्रक्षालन कर उनके जयकारों से उन्हें भी याद किया। अणु दर्शन यात्रा यहाँ विराजित महासती पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. आदि ठाणा – 4 के दर्शन के साथ मांगलिक श्रवण कर प्रातः 6 बजे थांदला से रवाना होकर रात्रि 9 बजे पुनः थांदला अपने स्थान पर पहुँची। इस पंच तीर्थ यात्रा के दौरान स्थानीय संघ ने नवकारसी से लेकर भोजन आदि का अनुपम लाभ लेते हुए संघ अध्यक्ष, सचिव का बहुमान भी किया।

अणु दर्शन यात्रा के साथ नगर के संत की विन्नति
धमर्दास गण नायक प्रवर्तक देव बुद्धपुत्र पूज्य श्री जिनेंद्रमुनिजी म.सा. एवं पुण्य पुंज पूज्या श्री पुण्यशीलाजी म.सा. आदि संत सतियों के दर्शन वंदन के साथ सामुहिक क्षमायाचना के लिए थांदला संघ जब रतलाम गया था तब उनके श्रीचरणों में थांदला से दीक्षित तत्वज्ञ पूज्य श्री धर्मेन्द्रमुनिजी, रोचक वक्ता पूज्य श्री संदीप मुनिजी, स्वाध्याय प्रेमी पूज्य श्री प्रशस्तमुनिजी, सेवाभावी पूज्य श्री सुयशमुनिजी, सेवाभावी पूज्य श्री जिनांशमुनिजी एवं नवदीक्षित पूज्य श्री ललितमुनिजी आदि ठाणा – 6 संतो के वर्ष 2026 के आगामी वर्षावास के लिए विन्नति कर चुका है। उल्लेखनीय है कि पूज्य श्री धमर्दास गण के समस्त संत – सतियों के आगामी वर्षावास की घोषणा गण के नायक प्रवर्तक देव पूज्य श्री जिनेंद्रमुनिजी के द्वारा प्रति वर्ष होली चातुर्मास में की जाती है जिसके लिए मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र आदि अन्य राज्यों के अनेक श्रीसंघ प्रवर्तक देव के साथ गुरुभगवंतों व महासतियों की सेवा में पहुँच कर अपनी झोली फैलातें है व जिन संघों को चातुर्मास मिलता है वे अपने को परम सौभाग्यशाली मानते है व जिन संघों को चातुर्मास नही मिल पाता है वे अन्य आराधना की विन्नति करते है साथ ही दोगुने उत्साह से अगले चातुर्मास के लिए लग जाते है। प्रवर्तक देव भी संत – सतियों की कमी व ज्यादा क्षेत्रो की विन्नति होने के कारण संत-सतियों की भावनाओं के साथ संघजनों कि भावनाओं में तालमेल बिठाते हुए उन्हें हर प्रकार से आश्वस्त करते है यही कारण है कि प्रवर्तक देव ने ताल की अनुपम भक्ति के कारण अपना 2025 रतलाम वर्षावास घोषित करने के साथ ही आगामी 2026 का वर्षावास द्रव्य-क्षेत्र-काल-भाव के समस्त आगमिक आगारों के साथ समय ताल घोषित कर दिया था।





