
सौरभ खेमसरा

झाबुआ – मेघनगर नगर में ज्ञानतत्व तपोमय चातुर्मास के अंतर्गत पूज्य साध्वीजी की मंगल प्रेरणा से सामूहिक अट्ठम तप की आराधना संपन्न हुई, जिसमे 63 तपस्वियों ने श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान की आराधना की 3 दिन की इस आराधना में आराधकों द्वारा 125 माला से प्रभू पार्श्वनाथ के जाप किए गए।
पूज्य साध्वीजी ने शनिवार को अपने प्रवचन में आज से लाखो वर्ष पूर्व आषाढी श्रावक द्वारा भरवाई गई, प्रभु पार्श्वनाथ की इस प्रतिमा का वर्णन करते हुए बताया कि, इस प्रतिमा की पूजा तीनो लोक में देवताओं ने की है, एवं श्री कृष्ण वासुदेव और जरासंध के युद्ध मे श्री कृष्ण के भाई प्रभू श्री नेमीनाथजी ने श्री कृष्णजी को अट्ठम तप की आराधना करने की प्रेरणा की, और श्री कृष्णजी ने, अट्ठम तप की आराधना कर, श्री पद्मावती माता से इस प्रतिमा को प्राप्त किया और जब श्री कृष्ण वासुदेव द्वारा शंख बजाकर इस प्रतिमा की स्थापना की तभी से इस तीर्थ का नाम श्री शंखेश्वर तीर्थ हुआ। उक्त जानकारी देते हुए रजत कावड़िया ने बताया कि, आज अट्ठम तप के सामूहिक पारणा, एवं सामूहिक भद्रतप, सिद्धितप का बियाशना का आयोजन श्रीसंघ द्वारा किया गया। आज के बियाशना का लाभ श्री नरेन्द्रकुमार, राहुल, आरव रांका, परिवार द्वारा लिया गया। साथ ही कावड़िया ने बताया की दिनांक 11 अगस्त, श्रावण सुदी सप्तमी से, 9 दिवसीय मंत्राधिराज श्री नमस्कार महामंत्र आराधना प्रारंभ हो रही है। नवकार आराधना का संपूर्ण लाभ, स्व सेठ समरथमलजी रूनवाल की स्मृति में, श्रीमती शिरोमणीदेवी समरथमलजी रूनवाल परिवार द्वारा लिया गया है। आज प्रवचन में भी पूज्य साध्वीजी में अधिक से अधिक आराधकों को आराधना करने की प्रेरणा की है।





