धर्म के काम में टांग अड़ाने की बजाय हाथ बटाएं सनातनी: पूज्य बालकृष्ण जी नागर
रिंगनोद नगर में शिव भक्ति की बयार, भव्य कलश यात्रा के साथ श्री शिव महापुराण कथा का हुआ शुभारंभ

योगेश गवरी
रिंगनोद । नगर रिंगनोद अति प्राचीन बाबा मनकामनेश्वर महादेव का मंदिर पर भव्य शिव महापुराण का आगाज हुआ जिसका शुभारंभ विशाल भव्य कलश यात्रा के साथ के साथ शुभारंभ हुआ जिसमें हजारों की संख्या में बालिका ने सिर पर कलश लेकर नगर के प्रमुख मार्ग से बाबा मनकामनेश्वर प्रांगण में हुआ समापन धर्म की धार नगर रिंगनोद में धार्मिक वातावरण में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। पूज्य गुरुदेव भगवान श्री बालकृष्ण जी नागर के मुखारविंद से आज यहाँ श्री शिव महापुराण कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिवस पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्म लाभ लिया।
नगर हुआ शिवमय, निकली भव्य कलश यात्रा
कथा प्रारंभ होने से पूर्व नगर में एक भव्य और विशाल कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में छोटी नानी बालिकाओं द्वारा एवं मातृशक्तियों ने सिर पर मंगल कलश धारण कर और नगरवासियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान बैंड-बाजों की धुन और शिव के जयकारों से पूरा रिंगनोद नगर शिवमय हो गया और वातावरण भक्ति के रंग में रंग गया।

सनातनी का धर्म है सहयोग करना
कथा के प्रथम दिवस पर व्यासपीठ से प्रवचन करते हुए पूज्य गुरुदेव श्री बालकृष्ण जी नागर ने सामाजिक एकता और सनातन धर्म के मूल्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “हम सबको समाज में मिल-जुलकर प्रेम से रहना चाहिए। सनातन धर्म का यही संस्कार है कि धर्म के किसी भी कार्य में हर सनातनी को आगे बढ़कर हाथ बटाना चाहिए, न कि किसी के काम में टांग अड़ाना चाहिए।”
शिव महापुराण श्रवण से नष्ट होते हैं पाप
ग्रंथ की महिमा का वर्णन करते हुए गुरुदेव ने बताया कि श्री शिव महापुराण का पाठ करने से वायु पुराण पढ़ने के समान फल की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा के साथ शिव महापुराण की कथा का श्रवण करता है, उसके जन्म-जन्मांतर के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में पुण्य का उदय होता है। महा आरती और महाप्रसादी का वितरण जूना अखाड़ा श्रद्धालुओं के द्वारा किया गया बड़ी संख्या में मातृशक्ति ने शिव महापुराण का श्रवण किया





