9 अगस्त को विश्व आदिवासी रूप के दिवस में उल्लास के साथ मनाया गया
पूर्वजों की फोटो पर माल्यार्पण कर के आमसभा का आयोजन किया

संदीप वर्मा

झाबुआ – थांदला में प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस के रूप में मनाया गया, सामाजिक संगठन जय आदिवासी युवा शक्ति थांदला एवं समस्त सामाजिक संगठन आदिवासी परिवार के द्वारा प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी 9 अगस्त को विश्व आदिवासी रूप के दिवस में उल्लास के साथ मनाया गया । जिसमें सबसे पहले ग्रामीण अंचल के लोग अपने पारंपरिक वेशभूषा और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ पुरानी अनाज मंडी थांदला में एकत्रित हुए और वहां पूर्वजों की फोटो पर माल्यार्पण कर के आमसभा का आयोजन किया
गया सभा में कई वक्ताओं के द्वारा सामाजिक जन जागरूकता के मुद्दों और के विषय में बात रखी गई , जिसमें समाज के वक्ताओं ने जल, जंगल और जमीन के हक अधिकारों और पैसा कानून पांचवी अनुसूची इतिहास संस्कृति वर्तमान में समाज की स्थिति के बारे में बताया, जिसमें सर्वप्रथम जिला कार्यवाहक अध्यक्ष बलवेंद्र वसुनिया ने सभा को संबोधित किया, और बताया कि जानकारी के अभाव में हमारे समाज के साथ बहुत ही शोषण और अत्याचार किया जा रहा है उसे किस तरह बचा जाए, इसी के साथ अगली कड़ी में थांदला जयस प्रभारी मदन डामोर द्वारा 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस के बारे में बताया, निलेश खड़िया संवैधानिक तरीके से जमीन के लिए लड़ना दिनेश सिंगाड धारा 13(3)क रूडी प्रथा के बारे में बताया गया तानसिंह मुनिया द्वारा आदिवासियों के द्वारा प्रकृति के संरक्षण के बारे में बताया गया और वीरसिंह भाबर द्वारा कहा गया कि समाज को एकजुट होकर राजनीतिक पार्टीयों से ऊपर उठकर समाज के लिए कार्य करने को कहा गया भीमा खोखर द्वारा आदिवासियों के इतिहास से लेकर संस्कृति संवैधानिक जानकारी एवं वर्तमान परिस्थितियों को अवगत कराया वही सभा के अंत में थांदला विधानसभा के विधायक पहुंचे और उनके द्वारा कहा गया कि सभी आदिवासी एक समान है और आदिवासियों को अपने हक और अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए एकजुट होना पड़ेगा और और अंत में भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा के विद्यार्थियों को उन्होंने यह भी आश्वासन दिया की वे स्थानीय महाविद्यालय का नाम जननायक टांटिया भील के नाम से करवाने के लिए विधान सभा में आवाज उठाएंगे । सभा के बाद सभी गांव से पधारे ग्रामीण लोगों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों और पारंपरिक वेशभूषा में शहर के मुख्य भागों से होते हुए जुलूस निकाला , सभा का मंच संचालन उदयसिंह गरवाल ने किया और आभार हरचंद जी मेडा द्वारा किया गया ।





