स्वच्छता सर्वेक्षण के दावों की खुली पोल, सड़क किनारे सड़ता रहा कचरा
स्वच्छता की तस्वीर धुंधली, जिम्मेदारों की लापरवाही आई सामने

देपालपुर । नगर परिषद देपालपुर एक ओर स्वच्छता सर्वेक्षण में अव्वल आने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की परतें उधेड़ती नजर आ रही है। शहर में सफाई व्यवस्था ऐसी दिखाई दे रही है मानो जिम्मेदारों के लिए स्वच्छता सिर्फ कागजों और बैठकों तक सीमित होकर रह गई हो।
बीते गुरुवार को इंदौर रोड स्थित ड्रेनेज की सफाई तो की गई, लेकिन उससे निकला कचरा सड़क किनारे ही छोड़ दिया गया। ऐसा प्रतीत हुआ जैसे सफाई अभियान का उद्देश्य केवल ड्रेनेज से कचरा निकालना था, उसे हटाना नहीं। सड़क किनारे पड़ी कचरे की ढेरियां व्यवस्था पर सवाल नहीं, बल्कि सीधे तमाचा मारती नजर आईं।
महाराणा प्रताप चौक से पुलिस थाने की पुलिया तक कई स्थानों पर कचरे के ढेर पड़े रहे। सफाई कर्मचारी द्वारा कुछ कचरा उठाया गया, लेकिन बाकी ढेरियां वहीं छोड़ दी गईं। सवाल यह है कि जब शहर की सफाई व्यवस्था सीमित संसाधनों और अधूरे प्रबंधन के भरोसे चल रही है, तो फिर स्वच्छता में अव्वल आने के दावे किस आधार पर किए जा रहे हैं ?

मामले की जानकारी स्वच्छता उपनिरीक्षक शैलेश कुराड़िया को भी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद हालात में कोई विशेष सुधार नजर नहीं आया। लोगों का कहना है कि शिकायतें जिम्मेदारों तक पहुंचने के बाद भी यदि स्थिति जस की तस बनी रहती है, तो इससे व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
विडंबना यह भी है कि नगर निगम इंदौर जैसे स्वच्छता मॉडल से सीख लेने के बावजूद देपालपुर में हालात सुधरने के बजाय सवाल खड़े कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी केवल दावे करते रहेंगे या शहर की तस्वीर बदलने के लिए ठोस कदम भी उठाए जाएंगे।





